नेता मस्त आम चूसन मा चमचा गुठली चाटन मा
एक लाख पुलिया में खरचा बीस लाख उद्घाटन मा।
आइल बाढ़ बूड़ि गइ खेती
हँसिया में नहिं लागल रेती,
बहि गइ मड़ई, छप्पर खटिया
गिरी भीत मरि गइलीं बिटिया।
मुनिया खोलि देखावइ पेट
कब होई रोटी से भेंट;
घर से माँगेन मूस विदाई,
नेता दिहले गाल बजाई
रासन दवा मिली सरकारी
माफ करब कुल मालगुजारी
राहत रासि बँटी कागज पे पचिग बन्दर बाटन मा
एक लाख पुलिया में खरचा बीस लाख उद्घाटन मा।
छैल चिकनिया खद्दरधारी
मंत्री पूत के ठेकेदारी,
जेठ महीना पड़िग पाला
गलियारे के मुँह भा काला।
बनतइ सड़क उखड़ि गइ मिट्टी
पहिलिन बारिस बहि गइ मिट्टी;
तारकोल बिकि गा रस्ते मा
कुल रुपिया मंत्री बस्ते मा,
बीच सड़क में भा मुसबिल्ला
करें विरोधी हल्ला गुल्ला।
फूल फूल नेता हिस्से में जनता उलझी काँटन मा
एक लाख पुलिया में खरचा बीस लाख उद्घाटन मा।
बीस डकैती हत्या तीस
केस अपहरण दर्ज पचीस;
डान माफिया एनकर खास
स्वर्णिम नेता के इतिहास।
एतनेउ पर जब टिकट न पाएन
निर्दल बनि जनता में आएन;
जोरि जोरि कर माँगेन वोट
बने विधायक मिटिग खोट,
हरिसचंद जस बिके बजार
मंत्री बने, बनी सरकार।
ऊँचा भाव भवा मंत्री के राजनीति के हाटन मा
एक लाख पुलिया में खरचा बीस लाख उद्घाटन मा।
मंत्री के तबियत नहिं ठीक
आइ सबेरेन ग्यारह छींक;
बड़ा डाक्टर दउड़ा आई
रहा रेडियो खबर सुनाइ।
कलुआ मरिग रहा बोखार
मंत्री पहुँचे कलुआ द्वार;
गहरी संवेदना जताएन
घड़ियाली आँसू टपकाएन।
आँसू पोंछि के खबर सुनावैं
सारी जनता ध्यान लगावै,
भइया अब तोहार सरकार
नभ में गूँजा जय जयकार।
बाजि उठी सत्ता मद की सहनाई मुर्दाघाटन मा
एक लाख पुलिया में खरचा बीस लाख उद्घाटन मा।
- पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 25)
- रचनाकार : मोहनलाल यादव
- प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
- संस्करण : 2023
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