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ने सीता, ने द्रौपदी

ne sita, ne draupadi

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

ने सीता, ने द्रौपदी

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    हम नहि हुए चाहैत छी

    सीता कि द्रौपदी

    जुनि करू हमर तुलना कोनो सतीसँ

    कियैक त' मोन पड़ि जाइत अछि

    पीड़ा, कष्ट, वेदना

    अपमानक दंश

    जे भोगने रही हम तखन

    जखन मर्यादा पुरुषोत्तम मँगने रहथि

    हमर सतीत्वक प्रमाण

    मोन पड़ि जाइत अछि

    नपुंसक सभसँ भरल सभागार

    जाहिमे एकटा अमर्यादित पुरुष

    हाथ रखने रहय हमरा वस्त्रपर

    करय चाहैत रहय हमरा निर्वस्त्र

    नहि बिसरलहुँ हम एखन धरि

    अग्निपरीक्षा कि चीरहरण

    अँय यौ

    कोन प्रतिष्ठा

    सीता किंबा द्रौपदी होयबामे

    अपन पतीक संग

    वनवास कि अज्ञातवास

    आइयो जा सकैत छी हम खुशीसँ

    मुदा

    अग्निपरीक्षा?

    किन्नहुँ नहि

    लाज बचेबाक लेल

    कोनो कृष्णसँ गोहारि

    किन्नहुँ नहि

    हम काटि लेबैक

    दुःशासनक बाँहि

    तोड़ि देबैक दुर्योधनक जाँघ

    स्वेच्छासँ छोड़ि देबनि रामक संग

    नारी बनि आयल छी एहि धरापर

    नारिये रहब, भने रहब

    आब नहि नीक लगैत अछि

    देवीक सम्बोधन

    सीता किंबा द्रौपदीक प्रतिनिधि भेनाइ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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