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न लौटने वाला कल

na lautne vala kal

अनुवाद : सुरेश सलिल

रेम्को कैम्पर्ट

रेम्को कैम्पर्ट

न लौटने वाला कल

रेम्को कैम्पर्ट

और अधिकरेम्को कैम्पर्ट

    पचास के दशक में यहाँ जुड़ता था दोस्तों का जमघट,

    आज मैं उसका स्मरणोत्सव मनाना चाहता हूँ।

    तब हरदम शरदऋतु का-सा आलम रहता

    यूरोप में, कोरिया में और अम्सटर्डम में,

    बात साफ़ थी :

    दो दर्जन दोस्तों और प्रेमिकाओं को छोड़कर

    व्यावहारिक तौर पर हर कोई तुम्हारा दुश्मन।

    बहुत कम उम्र में लंबे बाल—

    संगीतज्ञों के बाल अभी भी छोटे और कटे हुए होते थे—

    गली में छींटाकसी करते हुए, पास में कानी कौड़ी नहीं,

    अपनी अनाम हैसियत से हमने ख़ासी तीती ख़ुशी हासिल की।

    अब दुश्मन ने ऐसे तरीक़े अपना लिए हैं

    जिन्हें ताड़ पाना बहुत मुश्किल है :

    सप्ताहांत के आकस्मिक क्षणों में सिपाहियों की दबिश

    या खोजी-टीवी जैसे, जो तुम्हें और

    सभी लंबे बालों वाले मेहनती सनकियों को

    धर-दबोचें काफ़े में।

    दुश्मनों में से कुछेक तब भी

    तुम्हारे बहुत अच्छे दोस्त हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 386)
    • रचनाकार : रेम्को कैम्पर्ट
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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