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मुसलमान छी हम

musalman chhi hum

गुफरान जीलानी

गुफरान जीलानी

मुसलमान छी हम

गुफरान जीलानी

और अधिकगुफरान जीलानी

    के छल बाबर

    के छल गजनी

    हम नहि चिन्हैत छी

    दुःख होइए

    जखन लोक हमरा

    बाबर गजनीक

    वंशज कहैए

    वंशज हम नहि छी

    बाबर गजनीक

    हम तँ

    एहि माटि-पानिसँ उगल

    माँ जानकीक संतान छी

    मुसलमान छी हम

    मिथिलाक मुस्लिम

    रहय छी हमहुँ

    सीता जीक

    एहि पवित्र धरतीपर

    मुदा

    अपवित्र छी!

    अनसोहाँत लागैए

    जखन लोक हमरा

    सीताक धरतीपर

    मलेच्छ कहैए

    बात-बातपर

    पाकिस्तानी तुरुक कहैए

    हे यौ हमर भाइ!

    अहाँ किएक नहि बुझैत छी

    पाकिस्तान तुरुक नहि छैक हमर घर

    हम तँ

    एतहुका धूरा-माटि फाँकिकऽ

    अशफाकउल्लाह

    वीर अब्दुल हमीद छी

    अर्थो नहि बुझैत छी हम

    पाकिस्तानक

    इहो नहि बुझैत छी जे

    कतय छै तुर्की

    केहेन अछि लाहौर कराँची

    कोन रास्ता छै

    कोना जाइत छै ओतय

    रेलसँ कि बससँ

    सेहो नहि बुझैत छी

    किरकिटमे जखन

    हारैए भारत

    दुःख होइए हमरो

    सदमो लगैए

    कहियो-कहियो तँ

    निन्न नहि होइए

    पठानी शूट

    अरबी लिबास

    हम नहि बुझैत छी

    हम तँ फाटल लुंगी

    गंजी पिन्हइ छी

    बिरयानी तन्दूरी

    हम नहि खाइत छी

    हम तँ

    दालि-भात

    साग-भात

    सुक्खल रोटी, नोन-मिरचाइ खाइत छी

    दुइटा रोटीक चिन्तामे

    मजूरी करैत छी

    मजूरी करैत-करैत

    हमर दिन गुजरि जाइए

    आ, हम बम बनबैत छी

    पुलिस कहैए

    कियो नहि चाहैत छैक

    मलेच्छ जकाँ रहब

    हमहुँ नहि चाहैत छी

    मोन करैए हमरो

    दरोगा-बी.डी.ओ

    डाक्टर-इंजीनियर, प्रोफेसर

    कलक्टर बनबाक

    मुदा

    बनि नहि पबैत छी

    बनब कोना

    बाबू छैक हमर हरवाहा

    माय करैत छैक रोपनी

    पाँचटा भाइ छैक

    पाँचटा बहिनो

    भाइ सगरे

    भदोही-बनारस

    दिल्ली-मुम्बइ

    कलकत्ता खटय छैक

    दरी-गलीचा बीनैत छैक

    कियो करैत छैक जरीक काज

    कियो बैगक

    कियो दर्जीक

    कियो माय संग करैत छैक रोपनी

    बाप संग हरवाही

    किएक रहैत छैक मैला

    हमर टोल

    किएक गंध अबैत छैक

    हमर टोलसँ

    किएक हम

    खून-पसेनाक अपन कमाइ

    दऽ दैत छी

    डाक्टर फीसमे

    महाजनक सूदिमे

    कनेक कहब अहाँ...?

    स्रोत :
    • पुस्तक : लाल ओसक बुन्न [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 13)
    • रचनाकार : गुफरान जीलानी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2018

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