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मूँगा

munga

एवॉ तोथ

अन्य

अन्य

एवॉ तोथ

मूँगा

एवॉ तोथ

और अधिकएवॉ तोथ

    सागर जगाता मुझे सागर दुलराता है

    सागर के संग रात सागर पर भोर

    धुँधनील बालू-तट फेन पर उजास झाग

    फ़ीरोज़ी अम्बर पर झिलमिल से किरण-मेघ

    जाना सुख बहुतेरा जाना दुख-भार

    मुक्त मैं चिरैया-सी मैं भारी पहरे में

    तूफ़ानी सागर में उथल-पुथल केशजाल

    शांत हुआ सागर तब मेरा मुख रश्मि-दीप्त

    मेरी उदग्र देह लोथ बनेगी अब-तब

    सागर की मर्मर तमिस्र शवपेटी में

    मैं तकती सागर अजानती अदेखती

    मेरे धवल पंजर पर उगे वृक्ष मूँगे के

    स्रोत :
    • पुस्तक : दस आधुनिक हंगारी कवि (पृष्ठ 125)
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक गिरधर राठी, मारगित कोवैश
    • प्रकाशन : वाग्देवी प्रकाशन
    • संस्करण : 2008

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