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मृत्यु के बाद

mrityu ke baad

रवि यादव

रवि यादव

मृत्यु के बाद

रवि यादव

और अधिकरवि यादव

    एक मृत देह की जीवित परछाई पर लेटे हुए

    जब शरीर शिथिल हो चुका होगा

    जिसमें हवा की सबसे नरम कँपकँपाहट-सा भी

    कोई कंपन नहीं होगा तब

    गोइंठे का तीक्ष्ण धुआँ भी नहीं उठा सकेगा जीव को

    उस स्त्री को याद करते

    जिसने उस धुएँ की तीक्ष्णता में काट दिए हो

    अपने जीवन के आधे से अधिक दिन

    औरउसके आँसुओं की धार कभी नहीं सूखी

    उसकी याद में

    मृत्यु पर सबसे अंत में जलेंगे मेरे कंधे

    उस स्त्री के दु:खों के सारे आँसू

    इन्हीं कंधों ने सोख लिया है

    जो अंत तक आग में तपते भी गीले रहेंगे

    स्रोत :
    • रचनाकार : रवि यादव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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