क्या भाव दिए?
बीस रुपए में बारह
मुस्कराते नमकीन से चेहरे ने जवाब दिया।
मुश्किल से पंद्रह बरस की उम्र होगी
लड़कपन का कौंरापन (जवान होते किशोर)
दाड़ी पर हल्के उग आए बालों से झलक रहा था।
चालाकी, बदमाशी, काईंयापन तो न था
एक लगन ज़रूर थी
5000 रुपए के माल को पूरा बेचने की।
एक कमरे का तो घर है मैडम जी वो भी पूरे 3000 किराए पर।
ये पाँच बरस से दुकान लगा रहा है मैडम जी
बाजू में बैठी उसकी माँ ने बड़े गर्व से बताया।
*
रचना ने भी महीने भर पहले से बता दिया था।
दीदी धनतेरस से दीपावली तक छुट्टी लूँगी ही।
हमलोग दुकान लगाते हैं न
दिए, लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्तियाँ, खील-बताशे, रंगोली और फूलों की मालाएँ।
चार बिरिया (रात के चार पहर) माला गोएँगे दीदी
तब जाकर भुनसारे (सबेरे) दुकान लगाएँगे।
बच्चे भी हमारे साथ लगे रहते हैं।
उनके लिए तो यही त्यौहार है।
साल में तीन बार ही तो मौक़ा लगता है
हाड़-गोड़ (हाथ-पैर) एक करते हैं
तब अधकारी (अतिरिक्त) कमाई हो पाती है।
इस बार फ्लेट टीवी ख़रीदना है दीदी।
कोरोना ने तो ऐसा खाया कि पूछो मत।
लड़की भी अब दस बरस की हो गई
7-8 साल बाद उसकी भी शादी करनी है।
बेटा तो अभी पाँच बरस का ही है।
सब हो जाएगा दीदी, आप भी तो आओगे शादी में
सब एक साँस में ही बोल गई रचना।
शायद उसकी ज़िंदगी में भी कॉमा, पूर्णविराम नहीं हैं।
चेहरे पर वही मुस्कराहट थी जो दिए वाले लड़के के चेहरे पर थी।
**
ये इतना बड़ा टेम्पल क्या ब्रिटिशर्स ने बनवाया है?
भव्य जैन मंदिर के सामने ऑटो में बैठते हुए सुबि ने पूछा
मैंने कहा हाँ, देशी ब्रिटिशर्स ने
मतलब?
अबकी बार जवाब ऑटो वाले ने दिया
गुड़िया, देशी ब्रिटिशर्स मतलब वे लोग जो इतने भव्य मंदिर बनाने को तो दान करते हैं
लेकिन दिए ख़रीदते समय एक-एक रुपए का मोलभाव करते हैं।
जिनके पास इतना पैसा है कि दान देकर पुण्य ख़रीद सकें।
आठ बरस की सुबि, आँखों से कुछ कहती मेरी ओर देख रही थी।
ऑटो से उतरते ही चालीस रुपए ऑटोवाले की ओर बढ़ा दिए।
ऑटो वाले ने मेरी तरफ़ कृतघ्नता से देखा और हाथ जोड़ लिए।
सुबि के चेहरे पर वही मुस्कराहट थी जो...
ऑटो वाले से चालीस की जगह तीस का मोलभाव मैंने भी किया था।
***
दीपावली का मतलब
केवल दीपों का त्यौहार नहीं होता।
दीपावली का मतलब
यूट्यूब वाला मोबाइल ख़रीदने की चाह,
सात-आठ बरस बाद बेटी की शादी के लिए पाई-पाई जोड़ना और
ऑटो ज़्यादा चलाकर सूदखोर से लिए दस हज़ार रुपए का ब्याज़ चुकाना होता है।
**
दीपावली का मतलब
पाँच-छह दिन जनबच्चों समेत काम पर लगना
कई रातों को जागना
निन्ने पेट ऑटो चलाना और
पाँच हज़ार पर दो हज़ार का मुनाफ़ा होता है
जिसमें यु ट्यूब वाला मोबाइल तो हरगिज़ नहीं आ सकता।
- रचनाकार : सारिका श्रीवास्तव
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.