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मिथिला मे स्वागत अछि अहाँक

mithila mae svagat achhi ahank

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

मिथिला मे स्वागत अछि अहाँक

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    मोन पड़ल अपन माटि

    निकलि गेलहुँ मिथिलाक यात्रा पर

    बहुत हेरलाक बाद भेटल 'मिथिला'

    सीमान पर लागल छलै

    एकटा साइनबोर्ड

    'मिथिला वेलकम्स यू'

    शहर मे पैसिते अकचका गेलहुँ

    बुद्धिजीवी लोक प्रायः अंग्रेजी बाजै छथि

    किछु लोक हिन्दी सेहो

    अलोपि गेल अछि 'पग-पग पोखरि’

    निपत्ता अछि पान, माछ, मखान

    ताहि बीच

    एकटा पैघ भवन देखलहुँ

    म्यूजियम सन बुझना गेल

    ओकर माथ पर लिखल छलै

    'वी सेभ आवर हेरीटेज'

    हम प्रवेश कयलहुँ

    कतेको शीशा मे संजोगल छल संस्कृति

    पाग धोती

    विद्यापति, मंडन, अयाची जानकीक

    जीर्ण-शीर्ण प्रतिमा

    अरिपनक पुरातात्त्विक चित्र

    मैथिली भाषाक किछु अवशेष

    देखैत-देखैत

    झनझना उठल माथ

    हम बाहर पड़ेलहुँ

    नजरि घुमेलहुँ चारू कात

    नम्हर-नम्हर महल

    व्यस्त लोक

    तथाकथित विकसित शहर

    निर्लज्ज समाज, गुम संस्कृति

    सभ्यता बचेबाक भाभट

    मोन चेहा उठल

    हम पड़ेलहुँ

    दम घोंटि देत

    शहर सभ केँ गिड़ि जायत

    भागैत गेलहुँ, भागैत गेलहुँ

    पैर ओझरा गेल

    ठामहि खसि पड़लहुँ

    आह! स्वप्न छल

    भूलकि गेल रोइयाँ

    हे माँ मैथिली!

    कहियो सत्य नहि होइ

    नहि! नहि! कहियो नहि!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 95)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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