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मेरी दादी पहाड़ हो गई हैं

meri dadi pahaD ho gai hain

ऋचा कश्यप

ऋचा कश्यप

मेरी दादी पहाड़ हो गई हैं

ऋचा कश्यप

और अधिकऋचा कश्यप

    मेरी दादी पहाड़ हो गई हैं

    पहाड़ के मायने हैं

    विशाल, वृहद, प्रशस्त

    और ऊँचाईयों से भी और ऊपर

    खड़ी चढ़ाई में बारठा ऊपर ढोती

    सवेरे सबके उठने से पहले

    ओबरे से गोबर काड़ती

    खेत हुआ करते थे

    कोदा, कुकड़ी, आउ के

    जहाँ अब बगान खड़े किए हैं सेबों के

    जिसमें पड़ोसी देस से पलायन हुए मजूर है

    जिनकी पीठे पहाड़ों की तरह मज़बूत हैं

    अब की पीढ़ी में उतनी ताक़त कहाँ

    वैसी मज़बूत पीठ कहाँ

    जो ढो सकें बारठा खड़ी चढ़ाई में

    और कर सकें खेती-बाड़ी

    मेरी दादी को अब शायद याद ही रहा हो

    कैसी थी वो; पहाड़ जैसी

    प्रशस्त, विशाल, वृहद

    पहाड़ तो वे अब भी हैं

    असमर्थ, मूक, बुत और गतिहीन

    क्या नहीं ये पहाड़ के समानार्थी?

    स्रोत :
    • रचनाकार : ऋचा कश्यप
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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