मेरे हॉस्टल के सफ़ाई कर्मचारी ने सेनिटरी नैपकिन फेंकने से इनकार कर दिया है

mere hostel ke safai karmachari ne senitri naipkin phenkne se inkar kar diya hai

शुभम श्री

शुभम श्री

मेरे हॉस्टल के सफ़ाई कर्मचारी ने सेनिटरी नैपकिन फेंकने से इनकार कर दिया है

शुभम श्री

और अधिकशुभम श्री

    ये कोई नई बात नहीं

    लंबी परंपरा है

    मासिक-चक्र से घृणा करने की

    'अपवित्रता' की इस लक्ष्मण-रेखा में

    क़ैद है आधी आबादी

    अक्सर

    रहस्य-सा खड़ा करते हुए सेनिटरी नैपकिन के विज्ञापन

    दुविधा में डाल देते हैं संस्कारों को...

    झेंपती हुई टेढ़ी मुस्कराहटों के साथ ख़रीदा-बेचा जाता है इन्हें

    और इस्तेमाल के बाद

    संसार की सबसे घृणित वस्तु बन जाती हैं

    सेनिटरी नैपकिन ही नहीं, उनकी समानधर्माएँ भी

    पुराने कपड़ों के टुकड़े

    आँचल का कोर

    दुपट्टे का टुकड़ा

    रास्ते में पड़े हों तो

    मुस्कुरा उठते हैं लड़के

    झेंप जाती हैं लड़कियाँ

    हमारी इन बहिष्कृत दोस्तों को

    घर का कूड़ेदान भी नसीब नहीं

    अभिशप्त हैं वे सबकी नज़रों से दूर

    निर्वासित होने को

    अगर कभी जाती हैं सामने

    तो ऐसे घूरा जाता है

    जिसकी तीव्रता नापने का यंत्र अब तक नहीं बना...

    इनका क़सूर शायद ये है

    कि सोख लेती हैं चुपचाप

    एक नष्ट हो चुके गर्भ बीज को

    या फिर ये कि

    मासिक-धर्म की स्तुति में

    पूर्वजों ने श्लोक नहीं बनाए

    वीर्य की प्रशस्ति की तरह

    मुझे पता है ये बेहद कमज़ोर कविता है

    मासिक-चक्र से गुज़रती औरत की तरह

    पर क्या करूँ

    मुझे समझ नहीं आता कि

    वीर्य को धारण करने वाले अंतर्वस्त्र

    क्यों शान से अलगनी पर जगह पाते हैं

    धुलते ही 'पवित्र' हो जाते हैं

    और किसी गुमनाम कोने में

    फेंक दिए जाते हैं

    उस ख़ून से सने कपड़े

    जो बेहद पीड़ा, तनाव और कष्ट के साथ

    किसी योनि से बाहर आया है

    मेरे हॉस्टल के सफ़ाई कर्मचारी ने सेनिटरी नैपकिन

    फेंकने से कर दिया है इनकार

    बौद्धिक बहस चल रही है

    कि अख़बार में अच्छी तरह लपेटा जाए उन्हें

    ढँका जाए ताकि दिखे नहीं ज़रा भी उनकी सूरत

    क़रीने से डाला जाए कूड़ेदान में

    कि छोड़ दिया जाए

    'जहाँ-तहाँ' अनावृत...

    पता नहीं क्यों

    मुझे सुनाई नहीं दे रहा

    उस सफ़ाई कर्मचारी का इनकार

    गूँज रहे हैं कानों में वीर्य की स्तुति में लिखे श्लोक...

    स्रोत :
    • रचनाकार : शुभम श्री
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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