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मेरा पता

mera pata

पल्लवी जयराम

पल्लवी जयराम

मेरा पता

पल्लवी जयराम

और अधिकपल्लवी जयराम

    मुझसे मिलने के लिए

    कभी फ़ोन नहीं करना

    मैं जहाँ से गुज़री

    वापस लौटी ही नहीं

    इसलिए साथी, राह नहीं देखना

    चिट्ठी-पत्री सब बेकार क्योंकि

    मेरा ऐसा कोई पता नहीं

    मुझे देखना

    सुनना

    या मिलना हो

    तो किसी संघर्षरत स्त्री के

    आत्म-सीकरों में

    सहज मिल जाऊँगी

    महसूस करती उसके

    दोहरे संघर्ष को

    मेरा पता किसी किशोरी के

    प्रेम-पत्र लिखते हुए

    प्रेमी के प्रति

    कोमलतम भाव में है

    पुरुष-प्रेम से बहुत पहले

    कर गई हूँ कूच

    क्योंकि दावेदारी पसंद हूँ

    अतिक्रमण-वादी नही

    इसलिए तुमको

    पत्र-प्राप्तकर्ता के पास मिलूँगी

    प्रेमी से हुई प्रेमिका की उम्मीदों में

    मैं पालथी मारे बैठी हूँ

    प्रेमी की अरुचि और पति की वितृष्णा से

    चोट खाई हर स्त्री के

    व्यर्थता-बोध से भरे मन में

    मैं उदास मिल जाऊँगी

    व्याकुल मन को जीतकर

    इच्छाशक्ति से नव निर्माण के लिए

    सब तोड़ती हुई स्त्री के पास मेरा

    सर्वकालिक ठिकाना है

    क्योंकि मुझे प्रेम लोक में

    रहने की आदत है

    प्रेम निर्माण है

    सबसे बड़ी क्रांति है

    हर क्रांति, सृजन

    ध्वंस से ही करती है

    पहले वो तोड़ता है

    सामाजिक–व्यवस्था को

    शास्त्रानुमोदन को

    अपने निज चयन का

    ऐलान किया करता है

    इसलिए दुनिया के ऐलानियों में

    मुझे, मेरा आत्म-संगीत मिलता है

    क्योंकि चुनाव ही

    जीवन का भाष्य कर

    नए अर्थ देता है

    अतः मुझसे मिलने

    ऐसे भावों में

    ऐसी ही जगहों में आना।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पल्लवी जयराम
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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