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मेहरबानों लौट जाओ

meharbanon laut jao

ऋषभ पाण्डेय

ऋषभ पाण्डेय

मेहरबानों लौट जाओ

ऋषभ पाण्डेय

और अधिकऋषभ पाण्डेय

    त्रासद हो सकता है तुम्हारा आना

    अगर चेतना के शिलालेखों में

    दरार-सी पड़ गई हो!

    तुम्हारा आना कितना ख़तरनाक होगा

    गर पानी की सतहों पर

    कमज़ोर वक़्त के शैवाल तैर रहे हों।

    और उन शैवालों के ऊपर की

    दुनिया एकदम निविड़, सूखी

    और बेसुरी-सी लगे!

    फिर तो नहीं पढ़ा जाएगा

    धरती पर कोई दूसरा मर्सिया

    मसलन,

    बोझिल दीपों से

    उत्तरायण हो जाएँ

    मानवीय संबंधों की वह सभी नदियाँ

    तुम्हारा लौटना कितना ख़तरनाक हो सकता है

    जब चेख़व की कहानी का कोई पात्र

    अपने अंतिम शून्य में

    फूट-फूट कर रो पाए किसी घोड़े से लिपटकर

    या शिंडलर्स लिस्ट के अंतिम हॉफ़

    को देखते हुए जॉन विलियम्स की वायलिन

    टूटकर गिर जाए

    किसी ऐसी खाईं में

    जहाँ दुःख को दुःख और हिंसा को हिंसा

    कहा जा सके।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ऋषभ पाण्डेय
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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