हार्डवेयर की दुकान

आर. चेतनक्रांति

हार्डवेयर की दुकान

आर. चेतनक्रांति

और अधिकआर. चेतनक्रांति

    धूल की परवाह है

    उदासी से शिकायत है

    ही कोई आकर कहता है

    कि काउंटर पर हसीन लड़की भी नहीं!

    यह हमारी हार्डवेयर की दुकान है

    यहाँ हम चकरियाँ घिर्रियाँ तसले फावड़े उथले गहरे चौड़े लोहे

    प्लासटिक रबर और अल्मूनियम बेचते हैं

    हमारे पास रस्सियाँ जंज़ीरें और ताले भी हैं

    हैंडपंप के पाइप हत्थियाँ पानी खींचने की मोटरें

    और पंपिंग सेट के पुर्ज़े भी हम रखते हैं

    सुंदर चिकना और जिसे आप कहते हैं

    अनंत के मन में बस जाने वाली कौंध

    ऐसा कुछ तो हमारे पास नहीं है

    हरियाली भी नहीं है

    लाल, पीला, गुलाबी और सुनहरा भी कुछ नहीं

    बस यही काला कसैला मटैला धूलिया-सा है

    तितलियाँ इस पर नहीं बैठतीं

    ही यहाँ खड़े होकर शाश्वत के छंद सुन पड़ते

    कोई गंध भी यहाँ नहीं है

    हवा बस उतनी ही जितनी अपनी इच्छा से रह जाए

    किसी ख़ास तरतीब का ख़याल भी कभी नहीं आया

    बस चल रहा है

    बने-ठने और सुंदर ग्राहक हमारे यहाँ अक्सर नहीं आते

    कोई आता भी है तो बाहर से ही चला जाता है

    जैसे बस यही पूछने आया हो कि इस इतने सुंदर बाज़ार में

    बदनुमा तुम, हो किसलिए! यह लंबा-सा टेढ़ा-सा अजीब-सा

    यहाँ क्या टाँग रखा है!

    यह लोहे की तार है

    यह कठोर है चुभती है और खुल जाए तो आसानी से क़ाबू में नहीं आती

    आपको पता होगा लोहा अपना आसन मुश्किल से ही छोड़ता है

    हमारी ही तरह

    सारे बाज़ार की उदासी

    हम अपनी दुकान में ले आए हैं

    दर्ज़ी की, सुनार की, हलवाई की, ब्यूटीशियन की, बजाज की

    सबके पिछवाड़ों की ख़ामोशियाँ

    हमारे यहाँ आकर आराम से रह लेती हैं

    सबकी बेपरवाहियों को हम यहाँ बसा लेते हैं

    इन टेढ़े-मेढ़े बदरंग डिब्बों में

    इन फटी-खिंची बेडौल थैलियों में

    और भी जाने क्या-क्या रखा है बहुत कुछ है

    कभी फ़ुर्सत से आइएगा तो दिखाएँगे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : शोकनाच (पृष्ठ 93)
    • रचनाकार : आर. चेतनक्रांति
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2004

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