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मन के भाषा पढ़ल

man ke bhasha paDhal

कृष्णानन्द कृष्ण

कृष्णानन्द कृष्ण

मन के भाषा पढ़ल

कृष्णानन्द कृष्ण

और अधिककृष्णानन्द कृष्ण

    केहू के मन के भाषा के पढ़ल कठिन बा

    किसिम-किसिम के पहिरत बाटे लोग मुखैटा

    के जानत बा केकरा मन में भरल अगिन बा

    मन के बदले भाव कि जइसे उड़े चिरौंटा।

    कतनो बदले भाव पकंड में चलिये आवे

    मन के मुखडा दरपन होला साँच कहल बा

    कोशिश कइके लाख छिपावे छिप ना पावे

    मन के भीतर देखीं कइसन होड़ मचल बा।

    कबो-कबो कवनो पड़ाव पर मन भटकेला

    सोच पावे मन देखीं कइसन चकराला

    लाख करीं कतनो उपाय तरवा चटकेला

    सोझा-सोझी अहम आदमी के टकराला

    बड़ा महातम होला जग में सुनलीं भाई

    धरम अउर धीरज से केहू पार पाई।

    स्रोत :
    • पुस्तक : आपन गाँव भेंटाते नइखे (पृष्ठ 46)
    • रचनाकार : कृष्णानन्द कृष्ण
    • प्रकाशन : पुनः प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2012

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