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मैंने कविता की खोज कैसे की

mainne kavita ki khoj kaise ki

मेरिलियन नेल्सन

मेरिलियन नेल्सन

मैंने कविता की खोज कैसे की

मेरिलियन नेल्सन

और अधिकमेरिलियन नेल्सन

     

    अपनी मेज़ से मिसेज़ पुर्डी जिस तरह से
    कविता के शब्दों को
    मेरे मुँह में उड़ेल रही थीं
    वह आत्मा को चूमने जैसा ही दृश्य था


    कक्षा के बाक़ी बच्चों की
    कविता में रत्ती भर भी रुचि नहीं थी
    जबकि मिसेज़ पुर्डी और मैं,
    माउंट परनासस की हवाओं में बादलों से
    उड़ रहे थे
    श्रीमती पुर्डी ने कक्षा के किनारे बैठी
    सबसे गहरी आँखोंवाली लड़की यानी मुझे
    ज़रूर देखा होगा :
    अगले दिन उन्होंने मुझे एक कविता लाकर दी
    जो उन्होंने ख़ासतौर पर सारी कक्षा को पढ़कर सुनाने के लिए
    मुझ अकेली अश्वेत के लिए चुनी थी


    उस कविता को पढ़ने के लिए मुझे कहते समय
    वह मुस्कुराईं,
    ज़ोर से मुस्कुराईं,
    और कहा, ओह! हाँ मैं कर सकती थी
    वह और अधिक मुस्कुराईं
    जब तक खड़े होकर मैं
    अपने मुँह को बैंजो में तब्दील कर
    डार्कीज़1 , पिकैनिनीज़2 , डिसेस 3 और डैट्स 4 शब्दों वाली उस कविता को बजाती रही
    मैंने अपना कविता-पाठ समाप्त किया
    मेरे सहपाठी फ़र्श को देखते रहे
    शब्दों की शक्ति से मंत्रमुग्ध हो
    हम नि:शब्द
    अपनी बस की तरफ़ चल दिए



                 
    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : मेरिलियन नेल्सन

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