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माहुरक गाछ

mahurak gaachh

रामकृष्ण परार्थी

रामकृष्ण परार्थी

माहुरक गाछ

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    जानि ने के रोपि क' मरि गेल

    माहुरक गाछ

    जे प्रकृति पर्यावरणक कएने जा रहल अछि विषाक्त

    चौबीसो घंटा गछारने रहैत अछि

    एहि गाछकेँ मोटका-मोटका अजगर साँप

    गहुमन-करेत सभ एहि गाछपर जमौने रहैत अछि

    अपन अड्डा

    छोड़ैत रहैत अछि फुफकार

    एहि गाछक फल खा क' नीक-नीक आदमी

    बनि जाइत अछि नरपिशाच

    किनसाइत एहि गाछक रोपबइया एकरा पटौने छल

    घृणा-विद्वेषक पानिसँ

    जड़िमे देने छल उन्मादक खादि

    यैह कारण अछि जे आब गाछ

    आक्सीजनक बदलामे छोड़ैत अछि

    जाइ लाल ब्रोमाइड

    विध्वंसक फूल फसादक फल बला गाछ

    सुड्डाह करय चाहैत अछि वर्तमान सभ्यता

    एकरा कनिको नहि पसिन छैक मनुक्खता

    एहि गाछक नजदीक अएला मात्रसँ

    लोक बन जाइत अछि बताह

    फेर ओकरा नहि रहैत छैक

    गाम-समाज देश-दुनियाँक परबाहि

    एहि गाछ तर बैसि बनबय लगैत अछि

    विध्वंसक हथियार

    एहि गाछ तर बैसि लगबय लगैत अछि

    फसादक जोगाड़

    मुदा एकरा मतिभ्रम कही आकि दृष्टि-दोष

    एहि माहुरक गाछकेँ मोक्षक द्वार

    बुझैत अछि बहुसंख्यक लोक

    एहि अंधविश्वासमे माहुरक गाछक रक्षा लेल

    मानव बम बनबाक लेल भ' जाइत अछि तैयार

    गिरा दैत अछि हजारक हजार निर्दोषक लहास

    जखन कि क्षमा-दया, सत्य-अहिंसाक रास्ते—

    आसानीसँ पहुँचल जा सकैत अछि ईश्वरक दरबार

    प्रेम-सिनेह, शांति-सौहार्द्र-सद्भावनासँ खोलि सकैत अछि

    अपन मोक्षक द्वार

    मुदा सभ कियैक मानत हमर गप

    जखन कि माहुरक गाछ रोपय बला हिनकर सभक

    छनि अपन आदर्श!

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 32)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2022

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