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लुटिग बिहान बबुआ

lutig bihan babua

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

लुटिग बिहान बबुआ

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    जब से कुर्सी पे बइठा बेइमान बबुआ

    हमरे देसवा के लुटिग बिहान बबुआ।

    लुटिग जिनिगिया के आस बिसवास हो

    ठगवा बिनास के बतावेला बिकास हो,

    छुअत बाटै मँहगाई आसमान बबुआ।

    हमरे देसवा के लुटिग बिहान बबुआ।

    लूट भ्रष्टाचार के बहाइ रहे गंगा

    मंत्री विधायक अधिकारी भए नंगा,

    बेंचि दिहले धरमवाँ ईमान बबुआ।

    हमरे देसवा के लुटिग विहान बबुआ।

    जाति धरम घिरना के बढ़ा उन्माद बा

    सगरी नगरिया में दंगा फसाद बा,

    मिटा प्रेम सदभाव के निसान बबुआ

    हमरे देसवा के लुटिग विहान बबुआ।

    लागू करवाइ रहा करिया कनूनवाँ

    बेंचि रहा खेत बाग बेंचै सिवनवाँ,

    रोवैं कलपैं मजूर अउ किसान बबुआ।

    हमरे देसवा के लुटिग विहान बबुआ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 106)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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