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लोढ़े कुसुम तोरे कुसुमा

loDhe kusum tore kusuma

राज

राज

लोढ़े कुसुम तोरे कुसुमा

राज

और अधिकराज

    (कवि रंगकर्मी मित्र कुणालक लेल)

    हमर मोनमे सदरिकाल

    अंकित रहैए

    जिनगीक

    विकास गतिक

    रेखा-चित्रक परिकल्पना

    तोहर आँखि

    करेजमे

    आंकल रहै छौ

    विविध लोकनायिकाक संग

    कुसुमा मालिनक

    नदीक पानि सन

    थीर-चुहुल अल्पना

    ओना दूनूक

    रूप टा भिन्न छै

    हमरे तोरे जकती त'

    रहलो दू देहक

    अभिन्न छै

    सृजनक आदिये स'

    नित नवीन साँच

    सरंजामक टोहमे

    बौवाइत रहलए लोक

    चिन्हैत गेल

    खेपा-खेपी

    बहुतो जिनीस

    जे ओकर

    जिनगी के

    आसान

    जीबै जोगरक

    बना सकै छै

    जिनगीक 'सत्यम्'

    खाँहिसक संग

    जोहैत-जोड़ैत

    रहलए

    विविध

    'सुन्दरम' सरंजाम

    अही क्रममे

    चिन्हने छल

    सभ स’ पहिने

    फूलक रूप गंध

    ओकरो पूरा के

    लागल रहै नीमन

    एगो अनुभुवार सुगन्धि

    रचा गेल रहै

    तृप्तिक एगो नव छंद

    जानि गेल रहय

    कि एगो सौंस

    जिनगीक लेल

    जरूरी छै

    फूलो

    आगि अनाजे सन

    भाइ रौ!

    कुसुम सैह

    रहि गेल रहै

    नाम

    एहि फूल विशेषक

    कमला लखनदेइ

    नहरिक

    जिनगीदात्री

    पानि स' पटाओल

    लोहना गामक

    एहि छोट सन

    कियारी मे

    पिताक नेहक

    वसीयत सन

    तोहर करेजमे

    जुगताओल

    कुसुमा मालिनक

    लोकगंधी छविक

    प्रतीक बनल

    कुसुम अपन

    बीयाक संग

    (तोहर मांग रहौ ने!)

    तोहर बाट जोहै छौ

    लोढ़ कुसुम

    जेना तोरे कुसुमा

    रातुक बेटी

    साँझक

    अंचरामे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : ऐ अकाबोन मे (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 89)
    • रचनाकार : राज
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2011

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