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सप्ताहांत की मौज मस्ती

saptahant ki mauj masti

अनुवाद : सरिता शर्मा

माया एंजेलो

माया एंजेलो

सप्ताहांत की मौज मस्ती

माया एंजेलो

और अधिकमाया एंजेलो

    कुछ नक़लची लोगों को

    सच पता नहीं है,

    दिखावे के लिए ड्रेस पहनते हैं

    तरह-तरह के नाटक करते हैं,

    अकड़ कर चलते हैं।

    महँगे घरों में रहते हैं

    उनकी हैसियत से बढ़कर हैं जो,

    अपनी आत्मा को गिरवी रख देते हैं

    पास के बैंकों में।

    बड़ी कारें ख़रीदते हैं

    औकात से बाहर की,

    शहर के चक्कर लगाते हैं उनमें

    ऊबे होने का स्वाँग करते हुए।

    अगर वे सीखना चाहें जीवन सलीक़े से कैसे जीएँ

    शनिवार की रात मेरे जीवन को देखें।

    कारख़ाने में मेरा काम

    बहुत बड़ी चीज़ नहीं...

    पर मैं अपने बिल चुकाती हूँ

    और क़र्ज़ से मुक्त रहती हूँ।

    बालों का स्टाइल बनवाती हूँ

    अपनी ख़ुशी के लिए,

    इसलिए मुझे कुछ ख़रीदने की ज़रूरत है

    और ही ऐय्याशी करने की।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विश्व की श्रेष्ठ कविताएँ (पृष्ठ 96)
    • रचनाकार : माया एंजेलो
    • प्रकाशन : इंडिया टेलिंग
    • संस्करण : 2020

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