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अगली मेज़

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अनुवाद : शायक आलोक

सी. पी. कवाफ़ी

सी. पी. कवाफ़ी

अगली मेज़

सी. पी. कवाफ़ी

और अधिकसी. पी. कवाफ़ी

     

    वह बाईस वर्ष से अधिक का नहीं हो सकता।
    फिर भी मुझे पूरा विश्वास है—
    कम-से-कम उतने ही वर्ष बीत चुके हैं
    जब मैंने इसी देह का आनंद लिया था।

    यह कोई कामुक कल्पना नहीं है।
    मैं अभी-अभी इस जुआघर में दाख़िल हुआ हूँ
    और इतनी देर भी नहीं हुई
    कि शराब का असर हो सके।

    मैं कहता हूँ—
    यह वही देह है
    जिसे मैंने कभी अपने आलिंगन में पाया था।

    यदि मुझे ठीक-ठीक याद नहीं
    कि वह कहाँ था—
    तो उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?

    अब, जब वह सामने अगली मेज़ पर बैठा है
    मैं उसकी हर एक हरकत पहचान लेता हूँ
    और उसके वस्त्रों के नीचे भी
    मुझे फिर से दिखाई पड़ते हैं
    वे प्रिय, निर्वस्त्र अंग—
    जिन्हें मैंने कभी प्रेम से छुआ था।


    स्रोत :
    • रचनाकार : सी. पी. कवाफ़ी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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