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कुल सात लोग रहते हैं उस घर में

kul saat log rahte hain us ghar mein

पूनम शुक्ला

पूनम शुक्ला

कुल सात लोग रहते हैं उस घर में

पूनम शुक्ला

और अधिकपूनम शुक्ला

    बीमार है बस एक

    और कुल सात लोग रहते हैं उस घर में

    चद्दरें बेतऱीब-सी बिछी हुई हैं

    तकिए कुशन टेढ़े-मेढ़े

    ज्यों इन पर बाक्सिंग की गई हो अभी-अभी

    इस्तेमाल किए हुए कप गिलास

    इंतजार कर रहे हैं ख़ुद के उठाए जाने का

    दूध जो सुबह उबलते-उबलते गिर पड़ा था

    शाम तक अब फटने वाला है

    बीच-बीच में माहौल गरम हो रहा है घर का

    कोई बड़बड़ा रहा है कोई लड़खड़ा रहा है

    कोई रसोई में बस बर्तन खड़खड़ा रहा है

    गीली तौलिया तरस रही है धूप की ख़ातिर

    धूल की चादर ओढ़े फ़र्श ऊँघ रही है

    गमलों में प्यासे पौधे खोज रहे हैं पानी

    नल आधे ही बंद हैं पानी टपक रहा है

    शायद रसोई में कुछ पका है

    कुछ जला है कुछ होटल से आ गया है

    चेहरे सबके लटके हुए हैं

    चारो तरफ़ बस उदासी का मंजर है

    अब सोने की तैयारी है रात होने को है

    घर का मुख्य दरवाज़ा खुला ही छूट गया है

    बीमार है बस एक स्त्री उस घर की

    और कुल सात लोग रहते हैं उस घर में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूनम शुक्ला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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