Font by Mehr Nastaliq Web

क्षितिज का निर्माण

kshitij ka nirman

जनमेजय

जनमेजय

क्षितिज का निर्माण

जनमेजय

और अधिकजनमेजय

    संगीत समाप्त हो जाता है

    और पीछे उसकी गूँज रह जाती है

    वहाँ! जहाँ उसका मौन रह जाना था।

    बिना वजह बजाई गई

    प्रार्थना की घंटियाँ शांत हो जाती हैं

    और पीछे उनका मौन कंपन रह जाता है

    उनका उन्माद ईश्वर सोख लेता है।

    रात के निस्तब्ध अँधेरे में

    कहीं एक पक्षी का स्वर उठता है

    और इसके प्रतिउत्तर में—एक-दूसरे का

    दोनों स्वर मेरी खड़की तक आते हैं,

    ठहरते हैं और मिल जाते हैं और वहाँ

    एक क्षितिज का निर्माण करते हैं।

    क्षितिज! जहाँ मैं अपने विरोधाभासों को

    शेष रात के लिए

    एक सुसंगति में रख देता हूँ।

    स्रोत :
    • रचनाकार : जनमेजय
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY