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कोनो बात ने

kono baat ne

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

कोनो बात ने

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    काल्हि भोरे ककरो करचीक टाटपर

    देखलिऐक सुखाइत एकटा

    लाल दपदप नुआ

    लागल जेना ठाढ़ होइ अहाँ

    ओंगठिकऽ कोबराक दुरुखा

    पहिरने दुरगमनिया ललका सिफॉन।

    मोने अछि अहाँक मुँहठाँ

    भरल आँखि नोर

    छिड़िआयल केश

    डम्हायल दुधिया मुँह-ठोर

    जे लऽ कऽ

    चढ़ल रही महफापर

    बुझाइत रही जेना

    उमटाम भरल पोखड़िमे

    फुलायल होइक करमीक फूल ठाम-ठाम।

    आब ने दिन

    ने देह

    ने बहिक्रम

    जा अवसर छल

    ता चिन्ता-संघर्ष असवार छल

    आब आइ जखन कने फारकती अछि

    तँ दिने कतहु हेरा गेल

    जेना बालु भरल मुट्ठीसँ

    उमेरे पड़ा गेल।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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