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कोई पुकारता है मुझे

koi pukarta hai mujhe

लूईस चावेस

लूईस चावेस

कोई पुकारता है मुझे

लूईस चावेस

और अधिकलूईस चावेस

    जो कुछ याद है मुझे सब झूठ है।

    परछाई मेरी दादी की सुबह में।

    गीली चादरों के सागर के परे

    फैलाई गई हैं जो आँगन में।

    शंखों और घोंघों की एक सड़क

    खो जाती है जो प्रशांत सागर के फेन तले।

    माँ नज़र आती है पर्दों के पीछे से।

    छुप रही हो जैसे बुरी ख़बरों से।

    चिंतित हाथ रखे एप्रन पर।

    नाख़ूनों में बसी संतरे की महक

    हड्डियों के इलाज वाले जूते आरामकुर्सी के नीचे।

    गा रहा है कोई किसी दूसरी भाषा में

    और उसे समझ रहा हूँ मैं।

    यादें बनाती हैं नए घटनाक्रम

    रोकने के लिए अँधेरे का अपरिहार्य आगमन।

    मेरे साथ-साथ चलती हैं एक आईना लिए।

    एक समानांतर जीवन हो जैसे जो मेरे अपने जीवन से भी लंबा है।

    वर्तमान वह है, जो घटता है जहाँ मै कभी नहीं होता।

    वह चिराग़ जो फौसिल बनाता है मेरी लिखाई को।

    अनिद्रा जो सीख रही है चलना आग पर।

    स्रोत :
    • पुस्तक : यह संपन्नता बिखरी हुई (पृष्ठ 109)
    • संपादक : श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक श्यामा प्रसाद गांगुली, मीनाक्षी संद्रियाल
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी एवं ग्रूलाक
    • संस्करण : 2006

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