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कितना ज़हर है भरा हुआ

kitna zahr hai bhara hua

अनवर सुहैल

अनवर सुहैल

कितना ज़हर है भरा हुआ

अनवर सुहैल

और अधिकअनवर सुहैल

    समय का ये खंड भोगना ज़रूरी था

    वरना हम जान नहीं पाते

    कि हमारे दिलों में एक-दूजे के ख़िलाफ़

    भरा हुआ है कितना ज़हर

    नफ़रतों के इस दौर से उबरकर

    जल्द हम प्यार के दीए जलाएँगे

    बेशक एक दिन ज़रूर

    खाच्चियाँ भर-भर के प्यार बरसाएँगे

    स्रोत :
    • पुस्तक : उम्मीद बाकी है अभी (पृष्ठ 18)
    • रचनाकार : अनवर सुहैल
    • प्रकाशन : न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन

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