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किसी नीली आँखों में गहरा संताप देखकर

kisi nili ankhon mein gahra santap dekhkar

सुशील कुमार

सुशील कुमार

किसी नीली आँखों में गहरा संताप देखकर

सुशील कुमार

और अधिकसुशील कुमार

    नीलोफर नाम नहीं था उसका

    पर गहरी नीली उसकी आँखों में सैलाब था

    अव्यक्त सा आकिंचन एक दर्द का

    किसी दुस्सह-दुःस्वप्न को दुहराता हुआ

    जिसे कभी पलकों की कोर से ढरकते नहीं देखा

    पर जब भी देखा

    पाया बेतरह उमड़ता समुद्र-सा

    जिसकी लहरें किनारों से

    पछाड़ें खाकर बारंबार लौट जाती हो

    अंतर्लीन हो जाती हो

    अपनी ही पीड़ा की

    अथाह जल-राशि के निर्व्यक्त मौन में

    हर बार लौट आया

    अपने सपने की नाव

    उस दु:ख के सागर-तट पर छोड़ वापस

    हाँ, नहीं मैं नहीं पार पा सका

    उस नीलोफर की कोटरलीन तितिक्षु आँखों के रहस्य का

    स्रोत :
    • रचनाकार : सुशील कुमार
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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