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कयिस कयिस कनवजिया हउ?

kayis kayis kanavajiya hau?

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

कयिस कयिस कनवजिया हउ?

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

और अधिकबलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

    घरमा, बँभनन मा, हिन्दुन मा, हिन्दुस्तानिन, संसार बीच

    मरजाद का झंडा गाड़ि दिह्यउ, अब कयिस-कयिस कनवजिया हउ।

    तुम बड़े पवित्र, पूर पण्डित, नस-नस मा दउरा अंसिल खून,

    तुम खटकुल की खीसयि द्याखउ? तुम अयिस बड़े कनवजिया हउ।

    बहिनी, बिटिया कङ्गाल जाति की, तुमरे कारन पिसी जायिं,

    तुम सह्यब बने सभा मा भूल्यउ, कयिस, अयिस कनवजिया हउ।

    पढ़ि-पढ़ि पूरे पथरा भे हउ, घर-घर मा जगुआ छायि रहा,

    यी सयिति दिल्ली ते घाखति हयि, अयिस बड़े कनवजिया हउ।

    घ्वड़हा, उँटहा लदुआ किसान निज करमु करयिं तउ तुम डहुँकउ,

    अपनी बिरादरी का तूरति हउ, अयिस नीक कनवजिया हउ।

    तुम दकियानूसी बातन भूले, देस—काल ते पाछे हउ,

    तुम का गल्लिन की गिटई हँसती, अयिस खरे कनवजिया हउ।

    तुम जस-जस चउका पर झगरय्उ, तस जाति बीच भंभोलु भवा,

    दादा, अबहे कुछु चेति जाउ, तुम कयिस कयिस कनवजिया हउ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 143)
    • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
    • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
    • संस्करण : 1998

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