Font by Mehr Nastaliq Web

कठघरामे धर्मशास्त्र

kathaghrame dharmshastr

रामकृष्ण परार्थी

रामकृष्ण परार्थी

कठघरामे धर्मशास्त्र

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    जखन हम पढ़ैत छी

    अपन पुरखाक अभिशप्त इतिहास

    त' जेना इतिहासक पन्ना पर

    जीवित भ' जाइत अछि

    हमरा पुरखा सभक लहास

    सुनबय लगैत अछि

    अपन भोगल वीभत्स व्यथा

    देखबय लगैत अछि

    यातनासँ दागल

    अपना देहक हिस्सा

    पूछ' लगैत अछि निर्दय सभ्यता

    खूनियाँ संस्कृतिपर

    बहुते रास सवाल

    तखन हम देखैत छी

    कठघरामे खड़ा भ' जाइत अछि

    हमर धर्म धर्मशास्त्र

    हमर पुरखाक की छल अपराध

    जे देल गेल अपार दुख, अनंत कष्ट

    अनगिनत यातना!

    कियैक भेल हुनका संगे

    एतेक शोषन प्रतारणा

    ऊँच-नीच छुआछूत जनित भेदभावक

    के कयलक परिकल्पना

    जखन हम एहि प्रश्नक उत्तर खोजय लेल

    पढ़य लगैत छी धर्मशास्त्र

    त' अपराधी सभक खुनियाँ आँखि जकाँ लाग' लागैत अछि

    वेद-पुराण, महाभारत-रामायण आदि सभ शास्त्र

    एकर करिआ आखर सभ भ' जाइत अछि

    सुखल शोणितक रंग

    एहि पोथीसँ निकलय लगैत अछि

    शोषन, दमन उत्पीड़नक दुर्गंध

    जाहिसँ उत्पन्न घृणा आक्रोशसँ हम

    एहि शास्त्रकेँ

    उठाक' राखि दैत छी हठात्

    सोचय लगैत छी तुलसी-वाल्मीकि-वेदव्यास

    आदि विद्वान सभ मनुक्खतासँ कियैक केलथि

    एतेक नम्हर विश्वासघात

    मुदा सुनि लिअ गोस्वामी तुलसी दास, गुरु दोणाचार्य

    मनु महाराज

    अहाँ जे खड़ा केलियैक मनुक्ख-मनुक्खक बीच

    घृणाक देबाल

    एक ने एक दिन अबस्स भ' जायत विध्वंस

    किछु नहि रहत शेष

    कियैक त' बुद्ध, नानक कबीरक

    सेहो छैक देश

    हिनका सभक वाणीसँ सिंचित भ' रहल अछि

    भारतक संविधान नवका समाज।

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 61)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2022

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY