कठघरामे धर्मशास्त्र
kathaghrame dharmshastr
जखन हम पढ़ैत छी
अपन पुरखाक अभिशप्त इतिहास
त' जेना इतिहासक पन्ना पर
जीवित भ' जाइत अछि
हमरा पुरखा सभक लहास
आ सुनबय लगैत अछि
अपन भोगल वीभत्स व्यथा
देखबय लगैत अछि
यातनासँ दागल
अपना देहक हिस्सा
पूछ' लगैत अछि निर्दय सभ्यता
आ खूनियाँ संस्कृतिपर
बहुते रास सवाल
तखन हम देखैत छी
कठघरामे खड़ा भ' जाइत अछि
हमर धर्म आ धर्मशास्त्र
हमर पुरखाक की छल अपराध
जे देल गेल अपार दुख, अनंत कष्ट
आ अनगिनत यातना!
कियैक भेल हुनका संगे
एतेक शोषन आ प्रतारणा
ऊँच-नीच आ छुआछूत जनित भेदभावक
के कयलक परिकल्पना
जखन हम एहि प्रश्नक उत्तर खोजय लेल
पढ़य लगैत छी धर्मशास्त्र
त' अपराधी सभक खुनियाँ आँखि जकाँ लाग' लागैत अछि
वेद-पुराण, महाभारत-रामायण आदि सभ शास्त्र
एकर करिआ आखर सभ भ' जाइत अछि
सुखल शोणितक रंग
आ एहि पोथीसँ निकलय लगैत अछि
शोषन, दमन उत्पीड़नक दुर्गंध
जाहिसँ उत्पन्न घृणा आ आक्रोशसँ हम
एहि शास्त्रकेँ
उठाक' राखि दैत छी हठात्
आ सोचय लगैत छी तुलसी-वाल्मीकि-वेदव्यास
आदि विद्वान सभ मनुक्खतासँ कियैक केलथि
एतेक नम्हर विश्वासघात
मुदा सुनि लिअ गोस्वामी तुलसी दास, गुरु दोणाचार्य
आ मनु महाराज
अहाँ जे खड़ा केलियैक मनुक्ख-मनुक्खक बीच
घृणाक देबाल
एक ने एक दिन अबस्स भ' जायत विध्वंस
किछु नहि रहत शेष
कियैक त' बुद्ध, नानक आ कबीरक
सेहो छैक ई देश
आ हिनका सभक वाणीसँ सिंचित भ' रहल अछि
भारतक संविधान आ नवका समाज।
- पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 61)
- रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
- प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
- संस्करण : 2022
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