Font by Mehr Nastaliq Web

कतेक दिनक बाद

katek dinak baad

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

कतेक दिनक बाद

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

और अधिककाञ्चीनाथ झा 'किरण'

    कतेक दिनक बाद

    उगल छी हे मिहिर मिथिलाकेर

    छलहुँ कतय नुकैल?

    कोन बाधा-विन्ध्य

    पथकेँ देलेँ छल छेकि?

    की कोनो लक्ष्मी-पात्र व्यक्तिक

    कन्याक संग बिवाह

    कय, भोजन चहटगर

    नयनाभिराम सचार

    योग, उचिती, साँझ-कोबर-गीतकेर झंकार

    विधिकरी विदुषी, सुहासिनि सारिकेर परिहास

    दुलारू प्रेयसीकेर

    मधुमय लटारहम-जाल

    मे फँसि

    बिसरि पैत्रिक भूमि संग समाज परिवार

    ससुरवासी छलहुँ की भय गेल?

    अथवा धयले छलहुँ की राजनैतिक कोनो पार्टी

    जाहिसँ पदलोभ रोगग्रस्त

    छलहुँ की भय गेल?

    तञ छल भेल बाँतर

    मिथिलाक सङ सम्बन्ध?

    हम व्याकुलमना औनाइत

    नोरायल नयने छलहुँ बाट तकैत चारूकात।

    अछि अनेको सूर्य्य जगमे

    बड़का टटा, बड़ तेज

    मुदा हमर गोसाउनिक सीर लग घोँसिऐल

    हृदयक ग्रहमे सन्हिऐल

    जे अन्हार अछि तकरा

    कय नहि सकैत अछि दूर आन 'प्रकाश'।

    व्यर्थ भय रहलैन, जीवन-यत्न

    'योगी' महात्माकेर।

    अहाँ छी-अप्पन, सहोदर।

    एक जीवन स्रोत

    एक लक्ष्य पुनीत

    केहनो रहत तन

    पुष्ट वा दुबरैल

    मैल वा माजल सजावल

    हमर शोणित-स्नेह

    अहाँकेर पाथेय बनैक निमित्त

    अछि सतत तैयार।

    देखि, आइ अहाँक

    स्वस्थ पुष्ट-शरीर चुहिलगर रूप

    विषय-ज्ञान अनूप

    के अछि मैथिल एहन अमैथिल

    जकर नयन नहि जुड़ा रहल छै?

    जकर हृदयमे उमड़ि रहल नहि

    नवल उमंगक ज्वार?

    जे नहि अरपत अपन शक्तिकेँ

    अहँक चिरायुष लेल?

    बन्धु!

    धनक लोभ दय

    फूट सिरजि कय अजातशत्रु

    लोकतंत्रकेर जननी मिथिलाक उपर

    कयलेँ छल अधिकार!

    एखनहु धरि तकर प्रभाव

    नहि भेलैक अछि दूर

    मसुआयले छै मैथिलकेर अभिमान

    चोन्हरायले छै आँखि

    तञ हे मिहिर मिथिलाकेर

    करू किरणकेँ कने तेज

    तीख तप्त।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कतेक दिनक बाद (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 16)
    • संपादक : डॉ कैलासनाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास
    • रचनाकार : काञ्चीनाथ झा 'किरण'
    • प्रकाशन : किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान (धर्मपुर, लोहना रोड, दरभंगा)
    • संस्करण : 1989

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY