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कारी सागरमे डूबि गेल अछि सुरूज किरिन

kari sagarme Dubi gel achhi suruj kirin

ललितेश मिश्र

ललितेश मिश्र

कारी सागरमे डूबि गेल अछि सुरूज किरिन

ललितेश मिश्र

और अधिकललितेश मिश्र

    कारी सागरमे डूबि गेल अछि

    सुरूज किरिन

    पसरि गेल चतुर्दिक अन्हार

    अन्हार! आदिम अन्हार!!

    चऽर-चाँचर सभतरि

    पसरल जाइछ हाहाकार।

    जाति-उपजातिमे वर्गीकृत

    हेंजक हेंज मनुक्ख

    आऽ हेंजक हेंज चिड़ै-चुनमुनी

    सन्धानि रहल अछि बाट

    एकहि गाछ एकहि डारिपर

    एकहि रागमे, एकहि तालमे

    सन्धानि रहल अछि प्रात।

    हेंजक हेंजक मनुक्ख

    एकहि देशमे, एकहि नीतिपर

    अलगल-अलगल

    फराक रीति अवसर लेल

    बिमछल-बिदकल

    चाँछि रहल अछि तकरार

    संभव नहि होयत प्रात।

    कारी सागरमे डूबि गेल

    सुरूज-किरिन

    पसरल जाइछ अन्हार

    अन्हार! आदिम अन्हार!!

    देखब हम ओही दिन

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई-मिथिला
    • संपादक : बालमुकुन्द
    • रचनाकार : ललितेश मिश्र
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
    • संस्करण : 2020

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