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कहाँ ग विहान पिया

kahan ga vihan piya

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

कहाँ ग विहान पिया

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    सारी जिन्नगी गुलामी में सिरान पिया—

    कहाँ विहान पिया ना॥

    जब से मिली आजादी—ढेर बढ़ी बरबादी

    दूनउ जून नाहीं खाइ के ठेकान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    भुखिया-दुखिया परेसान-रोवैं छात्र नौजवान

    माटी मोल विकइँ मजदूर-किसान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    'राजा-राजा कहलावइँ—सेठ बाँसुरी बजावइँ।

    हमार जीते भइ जिन्नगी मसान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    गाँधी जी के वरदान चेला चाभइँ पकवान॥

    ओनहीं तिरंगा उड़ावइँ आसमान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    नेता बइठें राजधानी ईहाँ पियइ के पानी॥

    रोज उड़ई चन्द्रलोक के उड़ान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    सबइ नेता बोरइँ नाँव फिर से आइग चुनाव

    वोट देव कौने पार्टी के निसान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    आपन संगठन बनाव घर गाँव के जगाव

    तबइ होये सबके खेत खलिहान पिया—

    कहाँ बिहान पिया ना॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 54)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

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