जूलूस में जलते हुए
julus mein jalte hue
शंकरबीघा का सूरज
पूछता है मनोहरपुर के सूरज से
मनोहर के सूरज से पूछता है
शंकरबीघा का सूरज
कहाँ से तुम रोशनी लाए थे
सुबह के अंधकार में
जब सारा देश और पुरी दुनिया डूब गई थी
आकाशवाणी और अख़बारी ख़बर पर बिलखती हुई
किस क़दर कोढ़ियों को मरहम-पट्टी लगाने
वाले आस्ट्रेलियाई
ईसाई-धर्म-प्रचार डॉ. स्टेंस और उनके
मासूम बच्चों को
बजरंगदलियों ने जला डाला था
हिंदू धर्म की भी बहुतेरी पेथियाँ जिस पर
रोती जा रही हैं
जिनका जयकार उनका नारा होता है
बाबरी मस्जिद कांड हो अथवा बाथे जनसंहार
उड़ीसा का मनोहरपुर हो अथवा बिहार का
शंकरबीघा
एक ही जगह दाग़ा जाता है मासूमों के सोने में
दग़ने वाले ख़ूनी पंजे हों अथवा कृत्रिम कमल
कई-कई शक्लों में आते हैं
रणवीर सेना हो अथवा बजरंग दल
ख़ून के धब्बे लिए देवस्थानों को जाते हैं
घिनौनी शौर्यगाथा सुनाते हैं
मफ़लरधारी बाल ठाकरे की आँखों में खिलते हुए
दोस्तों, हमारा यह देश यदि ऐसा है
मेरा नाम हमेशा हमेशा के लिए यहाँ रहने दो
पाश का नाम फिर से जोड़ दो
कि लड़ते रहें हम इन काली ताक़तों के ख़िलाफ़
हमेशा के लिए
हम मफ़लधारी की आँखों को छेदते हुए
- पुस्तक : कालनदी (पृष्ठ 111)
- रचनाकार : शिवमंगल सिद्धांतकर
- प्रकाशन : अधिकरण प्रकाशन
- संस्करण : 2019
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