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जुगनू

jugnu

एक

जंगल में जितने अधिक दिखते हैं जुगनू

शहर में उतने ही कम दिखते हैं तारे

जंगलों के जुगनू

शहर के तारों का विस्थापन है।

दो

रात के हिस्से में भी होना चाहिए

तितलियों-सा ख़ूबसूरत कोई पतंगा

यह सोच ईश्वर ने

सृजन किया जुगनुओं का

जुगनू रात के अंधेरे में

मंडराती एक तितली है।

तीन

तारे टूटकर कहीं नहीं जाते

वे आते हैं धरती पर

और टिम-टिमाते रहते हैं

जुगनू बनकर।

चार

एक दिन पंख उग आए

रेडियम के भी

और उड़ने लगा वह नीम-अँधेरे में

धरती पर जुगनू पंख लगा रेडियम है।

पाँच

जुगनू रात में चूमते हैं, अंधेरे को

इस प्रणय-लीला में फूटती है

अंधेरे के होंठों पर

मुस्कुराहट की एक अदद रौशनाई।

छह

जुगनू विचरते हैं रात में

अंधकार इनकी मातृभाषा

धुंधलका अनूदित

और रौशनी विदेशी भाषा है।

स्रोत :
  • रचनाकार : कुलदीप सिंह भाटी
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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