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जो नहीं हुआ अब तक

jo nahin hua ab tak

ममता धवन

ममता धवन

जो नहीं हुआ अब तक

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    गुलाब का फूल जो तुमने मुझे कभी नहीं दिया

    ये जानते हुए भी कि मुझे फूल कितने पसंद हैं

    तुमने अपने प्रेम का गीत

    किसी भी प्रेम प्रतीक का सहारा लिए बिना गाया

    तुम मुझे कभी नदी किनारे नहीं लेकर गए

    जबकि तुम जानते हो कि कल कल बहता नीर मुझे कैसे बेसुध करता है

    तुमने अपना प्रेम का गीत कभी किसी माध्यम से नहीं सुनाया

    तुम ने कभी पर्वतों के ओट में ले जाकर

    घनी वादियों में मेरा नाम नहीं पुकारा

    जबकि तुम जानते हो

    ऐसा करने से प्रेम कितना प्रगाढ़ होता है

    तुमने आज तक न मेरा जन्मदिन मनाया

    न अपने प्रेम का इज़हार किया

    और न कभी मुझे कहा

    कि तुम्हें मुझसे प्रेम है

    तुमने...

    तुमने...

    तुमने...

    तो मेरी थकान को गरम चाय का प्याला दिया

    तुमने मेरे सर दर्द को तुरंत

    सेरीडोन पानी में घोल कर दिया

    तुमने मेरे पाँव दबाए

    जब जब मुझे नींद ने बेहाल किया

    तुमने मेरे लिए खाना पकाया

    जब जब काम में मेरा दिन निकला

    तुम हर उस वक्त मेरे लिए

    मुझसे पहले खड़े रहे

    जब मुझे अपने लिए वहाँ होना था

    तुमने मेरी अनुपस्थिति को अपनी

    उपस्थिति से पूरा किया

    तुमने मेरा हर वो काम किया

    जिस से मैं 'मैं' बनी रहूँ

    तुमने मुझे कभी गुलाब का फूल नहीं दिया

    किंतु मेरी रोजमर्रा की ज़िंदगी के कांटे

    तुम हर वक्त बिना किसी आग्रह के निकालते रहे

    तुमने मेरा जन्मदिन नहीं मनाया

    लेकिन तुम्हें पाकर

    सच!

    मेरे जन्म से ऊपजा मेरा ये जीवन

    मुझे आसान लगने लगा।

    और अब मुझे विश्वास है

    कि तुम हो

    तुम हो।

    तुम हो॥

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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