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जय जन्मभूमि

jay janmabhumi

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

जय जन्मभूमि

काञ्चीनाथ झा 'किरण'

और अधिककाञ्चीनाथ झा 'किरण'

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम!

    शैलाधिराज शिखरक निवास

    चन्द्र-मौलिकेर मुकुटक विलास

    छाड़ि जाह्नवी जग-धन्या

    धयने छथि जनिकर चरण-आश

    श्रीजानकीक नैहर ललाम

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम।

    सुरपतिक गुरुक पद गौरवमय

    वाचस्पति, छाड़ि एलाह जतय

    जतयक पावर्न-जीवन विलोकि

    ऐलाह उमापति गृही बनय

    बिनु नोतहि ऐला जतय राम

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम।

    निष्काम तपस्वी जतय मदन

    गोकुलनाथ सुधी मण्डन

    भेल शंकराचार्यकेर

    हारि, भारतीक अभिनन्दन

    संसार प्रणत सुनि जनिक नाम

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम।

    जे थिक नाका लोरीक देश

    छथि पूज्य जतय राजा सल्हेस

    गाबि मर्सिया दाहामे

    हिन्दुओ धरय जंगीक बेस।

    अछि कतय एहन छबि आनठाम?

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम।

    बरही, कुम्हार, ततमा, चमार

    साफी, नहेरि, पटवा, सोनार

    घड़िकार, गोढ़ि, छोलगढ़, ठठेर

    अछि जतय सर्व विधि कलाकार

    भय सकय स्वनिर्भर जतऽक गाम

    जय जन्मभूमि मिथिले प्रणाम।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कतेक दिनक बाद (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 73)
    • संपादक : डॉ कैलासनाथ झा, शिवशंकर श्रीनिवास
    • रचनाकार : काञ्चीनाथ झा 'किरण'
    • प्रकाशन : किरण मैथिली साहित्य शोध संस्थान (धर्मपुर, लोहना रोड, दरभंगा)
    • संस्करण : 1989

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