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जारी रहत विरोध

jari raht virodh

रामकृष्ण परार्थी

रामकृष्ण परार्थी

जारी रहत विरोध

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    जारी रहत विरोध

    जारी रहत प्रतिरोध

    हमरा बाद हमर बेटा

    हमरा बेटाक बाद हमर पोता

    चुप नहि राखत अपन आक्रोश

    जारी राखत अपन विरोध

    अहाँ कहबै स्वर्ग-नर्क

    कहत बकवास

    अहाँ कहबै पुनर्जन्म

    कहत अन्धविश्वास

    अहाँ कहबै भगवान

    कहत विज्ञान

    अहाँ चलबै दक्षिण

    चलत बाम

    बिनु प्रमाणकेँ नहि मानत

    अहाँक एकहु टा गप

    अहाँक सभ फूसि कल्पनाकेँ कसैत रहत

    तर्कक कसौटी पर

    अहाँक छल-प्रपंचक करैत रहत भंडाफोड़

    अहाँक षड़यंत्रक विरुद्ध

    जारी राखत अपन विरोध

    अहाँ कहबै धर्म

    कहत मनुक्खता

    अहाँ कहबै मठ-मंदिर

    कहत इसकूल-कॉलेजक शिक्षा

    अहाँ कहबै धर्मशास्त्र

    कहत संविधान

    अहाँ कहबै वर्णव्यवस्था

    कहत, हम नहि छी ककरो गुलाम

    बहुत दिन रखलहुँ अहाँ हमरा सभकेँ अन्हारमे

    अहाँकेँ औकाति नहि रहत जे रोकि लेबै

    ओकर सभक इजोत

    सभ तोड़ि देत ओहि सभ मान्यता, परम्परा

    वर्जनाकेँ

    जँ ओकरा बुझना जेतैक अपन विकासक अवरोध

    अहाँक वर्चस्वक संस्कृतिकेँ विरुद्ध

    सभ जारी राखत अपन विरोध

    नहि मानत भदबा

    नहि मानत खरमास

    नहि मानत ग्रह-नक्षत्र

    नहि मानत कोनो कर्मकाण्ड

    ओकरा बुझल रहतैक अहाँक विद्याकेँ

    मानव हितमे नहि छैक कोनो उपयोग

    अहाँक ढोंग-पाखण्डक विरुद्ध

    जारी राखत अपन विरोध।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विद्रोही बसात (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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