Font by Mehr Nastaliq Web

जमींदारी ठाठु

jamindari thathu

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

और अधिकबलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    चहयि बिसवयि बिसुवा बिकाय,

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    लरिकउनू की पसनी मँ भीर

    ठनक मिरदंगी ति होय दुआरे मा!

    बाउ पुरिखन की यह भागि

    जो जग्गि रचाउब तउ

    घुँघुरुन ते उठयि घमसानु

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    भला गैलन चारि होयँ

    तपउन चढ़ै खुब-खुब;

    बड़े काका कहयिं वहु ठीक

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    कहयिं मलकिनि ब्यारउ-ब्यार

    गहनवौ गिरौं करबै,

    मुलउ डेरा नचाउब चारि

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    उयि मंगलु गावयिं असीसु

    झँड़ूले जिययिं जुगुजुगु

    बिसमिल्ला लहरा-पटोरु

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    सब पंचन का ब्यवहारु

    बड़ाई हमार करयिं

    ठकुरस्ती की बात जायि

    नाचु बिसमिल्लइ का होय वसारे मा!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 152)
    • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
    • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
    • संस्करण : 1998

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY