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जब मैं बन जाती हूँ बाघ

jab main ban jati hoon baagh

अनुवाद : यादवेंद्र

लोरना गुडिसन

लोरना गुडिसन

जब मैं बन जाती हूँ बाघ

लोरना गुडिसन

और अधिकलोरना गुडिसन

    जिस दिन उन्होंने चुराया उसकी बाघ जैसी आँखों का छल्ला

    उसी दिन बन गई वह ख़ुद बाघ…

    उसने रिल्के की इस मामले में सलाह मानी

    जिसने कहा था : जब पीना पिलाना बन जाए जी का जंजाल

    और घुल जाए इसमें ख़ूब कड़वाहट

    तब करना यह चाहिए

    कि ख़ुद ही बन जाओ शराब

    दरअसल, बाघ सोता रहता है

    सारे समय उसके अंदर

    वह महसूस करती है उसका करवटें लेना

    ऊँघना और शिथिल पड़ जाना

    जब लेटती है वह उसके बग़ल में

    सात दिनों तक लगातार

    वह उसको देखती रही सामने के लंबोतरे आईने में

    उसकी निगाहें खंगालती रहीं आस-पास का सारा विस्तार

    लेकिन जब अंत में उसने झाँका अपने अंदर

    तब सामने दिखने लगा

    कविताओं और स्मृतियों से लबालब भरा हुआ विशाल रक्तिम परिदृश्य

    उसके दिल के अंदर घुसा हुआ एक दिल

    और उसके अंदर कद्दावर,चमकदार और गहरी सुनहरी धारियों वाला

    पसरा हुआ था एक बाघ

    रात में सपने में उसकी माँ उतारती है जब उसके कपड़े

    तब महसूस होती हैं उसको बेटी के अंदरूनी अंगों पर

    चौड़ी और ताज़ा उभरी हुई बाघ की धारियाँ

    और अँगारे-सी दमकती हुई सुनहरी पारदर्शी आँखें

    वह पहनने लगी है एड़ी तक लंबे परिधान

    ताकि ढंके रहें गोलाई लिए हुए दुम-स्थल

    उसने बाघ जैसी धारियों वाले पुष्प खोंस रखे हैं गुलदस्ते में

    और अपनी बिल्ली को भगाकर घर में

    बाँध लिया है बाघ के छोटे संस्करण वाला जानवर

    भोर में चार बजे उठ कर

    अभ्यास करती है वह अकड़ कर चलने का

    बड़े से हॉल के अंदर लंबे-लंबे डग भरते हुए

    बाघ के दूध में कौन-कौन-से अवयव होते हैं?

    क्या बाघ भी जोड़ों की तरह मैथुन करते हैं?

    क्या कोई अ-बाघ बाघ को अपनी पत्नी बना सकता है?

    ऐसे तमाम सवालों के जवाब

    इसी वक़्त माँग रही है वह…

    ज़ाहिरा तौर पर जो जी रही है

    एक बाघमय जीवन

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : लोरना गुडिसन

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