Font by Mehr Nastaliq Web

अप-टू-डेट समाज

ap tu Det samaj

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

अप-टू-डेट समाज

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

और अधिकचन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

    काका, मामा, मौसा, पीसा, सब कहबै छथि अंकल,

    भाषा भासल जाय, मुदा ककरो माथा नहि ठनकल।

    काकी, मामी, मौसी, पीसी कहा रहल छथि अण्टी,

    घड़ुछा भरि अंगूर, मुदा छै सबहिक एके डण्टी।

    सिरमे लग छनि स्वीच कि जगिते, बजा दैत छथि घण्टी,

    सुनिते से आवाज दौड़िते, आबय छौँड़ी बण्टी।

    सुति उठि बैसि ओछौने पर अंकल संगहि अण्टी,

    बिना कुड़ुर कयनहि पिबैत छथि, भोरे-भोर गरम टी।

    बूढ़ी सब देखि सूनि कऽ, पीटथि अपन कपार,

    अप-टू-डेट समाज बीच छै, बनल यैह संस्कार।

    पिता शब्द सुनि पित्त चढ़ै छनि, माँ सुनिते मन घोर,

    पप्पा-मम्मी पूतक मुँहसँ, सुनिते आत्म विभोर।

    स्रोत :
    • पुस्तक : चन्द्रनाथमिश्र ‘अमर’ रचना संचयन (पृष्ठ 385)
    • संपादक : योगानन्द झा, शम्भुनाथ झा, विजयदेव झा
    • रचनाकार : चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY