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ईश्वर की विदाई

iishvar ki vidai

पल्लवी जयराम

पल्लवी जयराम

ईश्वर की विदाई

पल्लवी जयराम

और अधिकपल्लवी जयराम

    अब वो ताक़त नहीं रही

    मेरे ईश्वर में

    जितनी बचपन में हुआ करती थी।

    तब वो बहुत जवान

    शक्तिशाली और समर्थ हुआ करता था।

    लेकिन अब तो बेहद कमज़ोर,

    निरीह नज़र आता है।

    लगता है उसकी रीढ़

    गोल-चक्कर खाना चाहती है

    जिसे सम्हालने की जुगत में,

    झुका-झुका रहता है।

    उसके गालों की कसावट

    चाल की फ़ुर्ती

    आँखों का तेज़

    और वाणी की हनक,

    सब में ग़ायब है।

    कल रात वो बहुत बीमार

    बैठा था

    कब्र में पैर झुलाए ...

    मैं उससे बात करना चाहती थी

    उससे कुछ कहना या वचन सुनना चाहती थी।

    लेकिन आवाज़ नदारद।

    बंद आँखें,

    धड़कनों में निः स्पंद अवरोध

    पैर ठंडे पड़ गए हैं।

    उसने बचपन से बहुत सम्हाला है

    गाहे–बगाहे दिलासे भी दिए हैं

    मेरा भी कर्तव्य है, स-सम्मान विदा करूँ

    ईश्वर को।

    अंतिम यात्रा के लिए...

    स्रोत :
    • रचनाकार : पल्लवी जयराम
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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