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प्रतिबद्धता

pratibaddhata

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

प्रतिबद्धता

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    काम्य सिद्धि हो

    लक्ष्य प्राप्त हो

    लालसा तँ करैत छी धरि

    से दबल रहि जाइत अछि

    जेना

    दबल रहि जाइत अछि

    हमर हितसाधक

    कोनो मूल्यवान कागत

    सरकारक कार्यालयक संचिकाक

    सान्हिमे।

    आवरणक मोट पन्ना

    हमर कागतक प्रकाशक आगाँ

    चीनक दीवार अथवा कहू जे

    हिमालय पहाड़ भऽ कऽ

    ठाढ़ भऽ जाइत अछि।

    अह्, आइ धूल धूसरित भऽ गेल

    दीवार

    हमर कागत बाहर भऽ गेल अछि।

    प्राप्तिक प्रति 'प्रतिबद्धता'

    जँ थेथर हो चाणक्यक

    कुशमूलोत्पाटनक प्रतिज्ञा जकाँ

    अथवा

    मजगुत हो मजनूक

    अपरिमेय प्रेमरस प्राप्तिक

    उत्कट अभिलाष जकाँ

    अथवा

    पहाड़ पर्यन्त के उत्खनित कऽ

    बाट बना देबाक दशरथ माँझीक

    हथौड़ी छेनी जकाँ

    तँ

    लक्ष्य प्राप्तिक लेल

    कोनहुटा दीवार

    कोनहुटा पहाड़ बाधक नहि

    अपितु

    साधक थिक बूझू।

    निष्ठासँ ठानल प्रतिज्ञा

    सत्य सतत् आराध्य थिक

    सत्यक समक्ष समस्त सिद्धि

    स्वतः साध्य थिक।

    खाली फूँसिक सोच करैत-करैत

    सरि जाइत छलहुँ हम

    जानि नञि किएक

    बिसरि जाइत छलहुँ हम

    टाल ठोंकि समुद्रमे

    बबंडरसँ जे लड़ैत अछि

    तकर योगक्षेम अनिवार्यतः

    समुद्रहि करैत अछि”

    शाश्वत सिद्धान्तहु जेना

    बिला गेलै आइ

    यउ, दोषी भाइ॥

    (मैथिलीक प्रख्यात कवि-कथाकार

    उपेन्द्र दोषी भाइकेँ समर्पित)

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 96)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

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