Font by Mehr Nastaliq Web

हम अथइ बूढ़ बाप छी

hum athai booDh baap chhi

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

हम अथइ बूढ़ बाप छी

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    हम कुसिआरक चूसल सिट्ठी छी

    ने बाँचल अछि कोनो रस

    ने आब कोनो (खट वा) मिट्ठी छी

    नूड़-गोबरौड़क संग लेढ़ायल

    गोदौस जकाँ कातमे बेढ़ायल

    आब हम धरतीक शाप छी

    हम अथइ बूढ़ बाप छी।

    हम आब जमीनसँ कटल छी

    कतेको छोट-छोट टोनमे बँटल छी

    जाधरि सौंस छलहुँ

    सौंसे घरक बौस छलहुँ

    आब केओ ने टेरैअए

    फूटलिओ आँखिए

    नहि केओ हेरैअए

    हम समूचा घरक पाप छी

    हम अथइ बूढ़ बाप छी।

    जा पात हरिअर छल

    रोब-दाब करिअल छल

    सबकेँ रसक लोभ छलै

    सबहक सेहन्ता पूर भेलै

    दुनू हाथें अपन सबटा लुटाकऽ

    अपने हाथें स्वयंकेँ मिटाकऽ

    श्वेत वस्त्रपर खसल

    एकटा बदरंग छाप छी

    हम अथइ बूढ़ बाप छी।

    हमरे जड़िसँ सबटा

    कनोजड़ि पनघल अछि

    मुदा नहि टेरैए हमरा

    अपन गुमानमे सनकल अछि।

    ओकरा गन्ध लगै छै हमर देहसँ

    ओकरा नहि पड़ै छै मोन

    पोसलिअइ कते नेहसँ

    नहि बुझैए एखन जे

    एकदिन सब जोआइए

    खाँहें गुड़ बनओ कि चीनी

    समयक मशीनमे अबस्से पेड़ाइए।

    आब बाजिएकऽ हैत की

    हम फूटल मृदंगक थाप छी

    हम अथइ बूढ़ बाप छी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 74)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY