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हे ईश्वरों हे परमेश्वरों

he iishvron he parmeshvron

प्रफुल्ल शिलेदार

प्रफुल्ल शिलेदार

हे ईश्वरों हे परमेश्वरों

प्रफुल्ल शिलेदार

और अधिकप्रफुल्ल शिलेदार

    क्रिसमस के दिन

    कुलाबा के होली नेम चर्च में गया

    क्रूस पर कीलों से गड़े जीजस के आगे

    नतमस्तक हो गया

    ईद के दिन

    क्रॉफर्ड मार्केट की

    जुम्मा मस्जिद गया

    नमाज़ पढ़ने के लिए माथा टेका

    बुद्ध जयंती को

    घाटकोपर के विहार में

    ‘अप्प दीपो भव’ बताते बुद्ध के आगे

    मोमबत्ती जलाकर नमन किया

    दिवाली के दिन

    प्रभादेवी के सिद्धिविनायक को

    फूल चढ़ाकर

    मन्नत भी माँगी

    पारसी न्यू इयर डे को

    चीराबाज़ार की अग्यारी

    गुरु नानक जयंती को

    बांद्रा का गुरुद्वारा

    सभी के उत्सवों में

    शामिल हुआ

    सभी के तेजोमय

    ईश्वर देखे

    अदब से अंदर जाते हुए

    और धर्म से लबालब

    जयजयकार करते बाहर आते हुए

    लोगों के चेहरे देखे

    पृथ्वी के सारे लोग

    बहुत सारे ईश्वरों ने

    आपस में

    बाँट लिए है

    किसी के पीठ पर

    ईश्वर ने

    अपना हाथ नहीं फेरा

    ऐसा कोई मिला ही नहीं

    सभी ईश्वरों के पास

    तो जा नहीं पाया

    सो पैदल चलते

    समुंदर के किनारे पर गया

    दूर क्षितिज पर आकाश ने

    समुंदर में डुबकी लगाईं

    और गहरे तल से सरसराते हुए

    ज़मीन होकर बाहर आया

    उसी ज़मीन पर खड़ा होकर

    आकाश की ओर देखकर

    सभी ईश्वरों को

    पुकारकर कहा

    हे ईश्वरों हे परमेश्वरों

    तुम्हारे निर्माताओं के सिर पर

    सवार हुआ है भूत तुम्हारा

    नाच रहा है भीषण

    तुम्हारी दीवानगी में

    एक-दूसरे पर वार करने वाले ये सारे लोग

    इनका एक होना मुमकिन नहीं

    लेकिन तुम तो एक हो सकते हो

    बहुत ख़ून-ख़राबा हो रहा है

    तुम्हारे नाम पर

    तुम्हारे अलग-अलग होने के नाम पर

    धज्जियाँ उड़ाई जा रही है इंसानियत की

    कर्मकाँड के नाम से

    हो रहे है हत्याकाँड

    उपदेशों के अर्थ पर

    अनर्थ का असहनीय गरल

    मुक्त करो तुम्हारी पकड़ से हमें

    हो जाओ सभी विसर्जित इस समुद्र में

    बस एक उर्जा होकर रहो

    अँधेरे को ध्वस्त करने वाली

    स्रोत :
    • रचनाकार : प्रफुल्ल शिलेदार
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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