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हे बाबू

he babu

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    अइसी आइल कठिन समइया हे बाबू

    चारिउ ओरिया खड़े कसइया हे बाबू।

    देखो तो विकास केतना पगलाइ गवा

    मुरगा जइसे कटैं मनइया हे बाबू।

    डीजल अउर पेटरोल में देखौ आग लगी

    उड़ै अकासे में महँगइया हे बाबू।

    उहीं देखावा सीना जहाँ खतरा होइ

    समझि बूझि के करौ ढिठइया हे बाबू।

    कुकुरे के तौ मैडम राखइँ कूलर मा

    सास ससुर के टुटी मड़इया हे बाबू।

    आपन बोली भाखा सबसे नीक अहै

    अँगरेजी के करौ बिदइया हे बाबू।

    आइ गवा स्मार्टफोन हर हाथन मा

    फेसबूक पे बढ़ी मितइया हे बाबू।

    बेटवा कहै बिआहे में चरपहिया लेब

    पइसौ भर के नहीं कमइया हे बाबू।

    गाँव विकास के जेहि दिन से अभियान चला

    गायब होइ गए ताल तलइया हे बाबू।

    गुंडा अपराधी संसद में पहुँचि गए

    सब जनता के खून चूसइया हे बाबू।

    सहर घुसि गवा गाँव में सत्यानास भवा

    मूतइ हगइ के लगै रुपइया हे बाबू।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 79)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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