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हवा का तेरा भाग

hava ka tera bhaag

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

ज़्वोनीमीर गोलोब

ज़्वोनीमीर गोलोब

हवा का तेरा भाग

ज़्वोनीमीर गोलोब

और अधिकज़्वोनीमीर गोलोब

    क्या बदल जाएगा तेरे बाद, कविते?

    संयुक्त रक्तप्रवाह में वही आह,

    लाज का वही स्तंभ, वे ही ज़ंजीरें

    जहाज़ की तलहटी पर जो कहीं जा रहा।

    सबसे पहले विश्वास, फिर संदेह,

    तीन-चार प्रेम, यदि काफ़ी हों,

    इच्छा जीने की, इच्छा मर जाने की,

    और फिर रह जाता है वही जैसा कि था।

    बिस्तर, नंगी औरत, इसके बाद क्या?

    पारदर्शी जड़ें जिनका स्पंदन

    कह रहा है कि तू छोटी है और पानी बढ़ रहा है

    और चल पड़ा है तेरे बजाए और कोई।

    क्या बदल जाएगा? कुछ नहीं।

    यदि देख रही है जो वास्तव में देख रही है।

    दूसरे चाहेंगे वह सब जो तूने फेंक दिया,

    वे साँस ले लेंगे हवा के तेरे भाग की, और सो जाएँगे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 130)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : ज़्वोनीमीर गोलोब
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

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