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हासिल

hasil

सदानंद शाही

अन्य

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और अधिकसदानंद शाही

    समय का पहिया चलता रहता है

    मुट्ठियों से रेत सरकती जाती है

    बुलबुले उठकर विलीन हो जाते हैं

    लम्हा दर लम्हा बीत जाता है

    पल

    पल भर में बदल जाता है

    फिर भी

    कुछ लम्हे कुछ पल

    आते हैं

    और ठहर जाते हैं

    आख़िर में जब हम करते हैं

    हिसाब-किताब

    तब

    यही कुछ पल

    यही कुछ लम्हे

    हासिल निकलते हैं।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सदानंद शाही
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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