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हरसिंगार

harsingar

आरसी प्रसाद सिंह

और अधिकआरसी प्रसाद सिंह

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    झड़ झड़ झड़य सुमन, मँह मँह मँह मँह पथार।

    मन्द-मन्द मलय पवन;

    सुरभित उपवन, वन-वन।

    मादक मोहक प्रसाद

    बाँटि रहल भवन-भवन।

    आँगन-आँगन सुवास बहय सरस सुरुचि धार।

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    उगिते अरुणिम बिहान,

    सुनिते श्रुति विहग-गान;

    विकसय सुखसँ बिभोर

    सूर्यमुखी हमर प्राण।

    पँखुड़ी-पँखुड़ी बिहँसय फूलल अन्तर अपार।

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    उत्सव रंगारंग!

    लाख-लाख मधु-प्रसंग!

    लाख-लाख मधु-प्रसंग!

    गुंजन कऽ रहल मधुप,

    बाजि रहल जल-तरंग।

    एक-एक किरण-तार-सुरमे सय सय सितार।

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    जे अयबह, आबि जाह,

    बिनु मँगने लोढ़ैं जाह।

    आंचर-भरि गम-गम

    गमकैत गगन ओढ़ैं जाह।

    आइ पुहुप-प्रीति-भोज, सबकेँ सब ठाँ हँकार।

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    नाम-गाम बिसरि जाह।

    काम-काजसँ पड़ाह।

    भावनाक गंगा बहि

    रहलि, डूबि कऽ नहाह।

    जानय संयोग एहन हयतह की पुनि उदार?

    मोन हमर शरत-प्रात, प्राण हमर हरसिंगार।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूर्यमुखी (पृष्ठ 11)
    • रचनाकार : आरसी प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : मैथिली अकादमी, पटना
    • संस्करण : 2011

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