हरे रामा, सावन मा सब नर नारी
hare rama, savan ma sab nar nari
मनोज मिश्र ‘कप्तान
Manoj Mishra ‘Kaptaan
हरे रामा, सावन मा सब नर नारी
hare rama, savan ma sab nar nari
Manoj Mishra ‘Kaptaan
मनोज मिश्र ‘कप्तान
और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान
हरे रामा, सावन मा सब नर नारी, जपत त्रिपुरारी, रे हारी
हरे रामा, हर हर बम जयकारी, जपत त्रिपुरारी रे हारी,
दोउ सैल सुता सुत राजें,
मंदिर सिउ सिवा विराजें,
हरे रामा, नंदी की सेवादारी, जपत त्रिपुरारी रे हारी,
हरि सोइ रहे, हर जागें,
सब भगत खड़े वर माँगे,
हरे रामा, सबकी है दुनियादारी, जपत त्रिपुरारी रे हारी
भूतेश्वर मस्त मलंगा,
सिर ऊपर सोहैं गंगा,
हरे रामा, जय हो बाघम्बर धारी, जपत त्रिपुरारी रे हारी
चन्द्रेस्वर इस चौमासा,
पूरी कर दो अभिलाषा,
हरे रामा, दुखिया सकल खसियारी,
दुखिया सकल संसारी, जपत त्रिपुरारी रे हारी
- पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 53)
- रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
- प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
- संस्करण : 2025
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.