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घर की बड़ी बेटी

ghar ki baDi beti

विकास गोंड

विकास गोंड

घर की बड़ी बेटी

विकास गोंड

और अधिकविकास गोंड

    वह मेरे घर की सबसे बड़ी बेटी

    जिसके सात भाई और एक बहन हैं

    पिता कोई जमींदार नहीं थे,

    और माँ एक औरत के अलावा और कुछ थी

    यह समय 1970 से और पहले का है

    जब घर की बड़ी बेटी मज़दूरी करती है

    किसी और के खेतों में

    और मज़दूरी में लाती है अनाज

    थोड़े आलू और खाना पकाने के लिए लकड़ियाँ

    और इनार (कुआँ) से पानी

    जब बरसात में मड़ई चुने लगती

    तो काट लाती गाँव के दखिन से काश और मूज

    बाबा बना देते रहने लायक मड़ई की हवेली

    और माई अपने सभी बच्चों को

    समेटकर सो जाती मड़ई में

    घर की बड़ी बेटी बहुत कम उम्र में

    सीख जाती हैं चूल्हा पोतने से लेकर

    बर्तन धोना और खाना बनाना

    घर की बड़ी बेटी अपने छोटे सभी भाई बहनों को पालती है

    उनकी गंदगी भी साफ़ करती है

    मैं सोचता हूँ कितना कठिन था

    उसके लिए परिवार में

    आठ लोगों से बड़ा होना

    कभी गन्ने के रस

    कभी जौ के सत्तू

    तो कभी मटर खा कर

    दिन गुजरना कितना मुश्किल होता होगा

    माँ जब चूल्हा जलाकर

    भुजती थी गाँव के लोगों का भुजा

    तो बदले में मिल जाते थे थोड़े अनाज

    उन दिनों वहीं पेट भरने का

    एकमात्र स्रोत था

    और आज वही बड़ी बहन मर गई है

    उसे देखने नहीं गए

    उसके सात भाई

    एक बहन

    और मैं भी!

    स्रोत :
    • रचनाकार : विकास गोंड
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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