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एकटा छली धेमुरा

ekta chhali dhemura

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

एकटा छली धेमुरा

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    नेपालक धनकुट्टासँ

    मिथिलाक गोरहो घाट धरि

    वैदिककालीन धर्ममूला

    आ, बौद्धकालीन धम्ममूला

    जे सहस्राब्दीक जीह-ठोरसँ घसाइत-घसाइत

    धेमुराक नाम धरेने अछि

    धेमुरा मात्र

    एकगोट नदिये नहि थिकीह

    थिकीह कोनो युगक

    स्वर्णिम सभ्यता-संस्कृतिक पहिचान

    जतय डुबकी लगाकऽ

    अष्टावक्र पओने छलाह स्वास्थ्य लाभ

    आ, परमहंस लक्ष्मीनाथ

    नेनपनेसँ करैत छलाह जलक्रीड़ा

    सीखैत छलाह

    पानिक शिरा-भाटाक चालिसँ

    हठ योगक दाँव-पेंच

    पानिये पर पलथा मारि

    साधैत छलाह आठो सिद्धि

    जकर कोखिक

    निर्मल पानिमे

    बसैत रहै किसिम-किसिमक

    माछ, काछु, सोंसि नकार गोहि

    कछेरक काश-झौआ

    आ, पटेरक झोंझिमे

    राजा बनैली बरुआरीक

    राइफिलक आवाजसँ

    चरगन होइत रहै

    चिड़ै-चुनमुनीक संग

    बाघ, हरिण, नीलगाय बनैया सुग्गर

    तहिया मल्हनी परगनाक

    बलहा ग्राममे

    (उत्तरी अक्षांश-26.07247

    पूर्वी देशांतर 86.54473)

    धेमुरा धारपर

    कुहली पुल रहै

    ईस्ट इण्डिया कम्पनीक बनाओल

    जे जोड़ैत रहै विदेहकेँ

    तिरहुत पुण्ड्रवर्द्धनसँ

    तामाक सैकड़ो खाम्हपर

    घनेरक-घनेर रहै लोहाक गाटर

    बीहैत रहै बीस हाथ गँहीर पानि

    एहेन रहै धेमुराक शान

    सन् 1922 मे कोशीक एकटा फोंड़ी

    मिललै घेमुरामे

    सन् 1931 मे

    धेमुराकेँ गीर गेलै कोशी

    आ, धेमुरे बनि गेलै

    कोशीक मुख्य प्रवाह

    पानि जे धकियाबै

    सहस्राब्दीक बूढ़ पुलकेँ

    ताहिसँ निकलै सिसकीक आवाज

    जहिना-जहिना बढ़ल गेलै

    पानिक धकियायब

    तहिना-तहिना बढ़ल गेलै

    पुलक कनबाक सिसकी

    आ, से एहेन भियाओन जे

    जेना धेमुरा कछेरक समस्त जीव-जन्तुक

    एक्के संग कनबाक स्वर सुनि

    रातिकेँ डेराइत रहै

    मनुक्खक संगे-संग

    आनो जीव-जन्तु चिड़ै-चुनमुनी

    पुलक करुण क्रंदनसँ

    1937 मे टुटि गेलै पुल

    चुप भऽ गेलै रोदनक स्वर

    मेट गेलै कुहली पुलक नामो-निशान

    डूबय लागलै हाथी पर्यन्त

    1942 धरि

    अनचिन्हार बनल रहल

    धेमुराक अस्तित्व

    जे एखन बरसाती नाला बनल अछि

    फुलक भग्नावशेष गाटर सभ

    एहि अरोपट्टा-परोपट्टाक

    इनार-पोखरिक संग

    धोबिघट्टामे

    धोबियाक पाट बनल

    तामाक खाम्ह सभ

    अधरतियामे उखड़ि

    जमींदार लोकनिक

    अगुआड़-पछुआड़मे

    खधिगरुआ बनि

    अपन

    डायमण्ड वा प्लेटिनम जुबली वर्ष

    मनेबाक लेल

    भारत बिहार सरकारक

    इतिहास पुरातत्व विभागक

    पुरोधा लोकनिकेँ

    नोत-हकार पुरबाक लेल

    बोकिया रहल अछि...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 75)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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